(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.22. अध्यायः 022
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
सर्पौर्मातृवचनादुच्चैःश्रवःपुच्छवेष्टनम्॥ 1 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Text

सौतिरुवाच। 1-22-0x(88)(1307)
नागाश्च संविदं कृत्वा कर्तव्यमिति तद्वचः।
निःस्नेहा वै दहेन्माता असंप्राप्तमनोरथा॥ 1-22-1(1308)
प्रसन्ना मोक्षयेदस्मांस्तस्माच्छापाच्च भामिनी।
कृष्णं पुच्छं करिष्यामस्तुरगस्य न संशयः॥ 1-22-2(1309)
`इति निश्चित्य ते तस्य कृष्णा वाला इव स्थिताः।'
एतस्मिन्नन्तरे ते तु सपत्न्यौ पणिते तदा॥ 1-22-3(1310)
ततस्ते पणितं कृत्वा भगिन्यौ द्विजसत्तम।
जग्मतुः परया प्रीत्या परं पारं महोदधेः॥ 1-22-4(1311)
कद्रूश्च विनता चैव दाक्षायण्यौ विहायसा।
आलोकयन्त्यावक्षोभ्यं समुद्रं निधिमम्भसाम्॥ 1-22-5(1312)
वायुनाऽतीव सहसा क्षोभ्यमाणं महास्वनम्।
तिमिंगिलसमाकीर्णं मकरैरावृतं तथा॥ 1-22-6(1313)
संयुतं बहुसाहस्रैः सत्वैर्नानाविधैरपि।
घोरर्घोरमनाधृष्यं गम्भीरमतिभैरवम्॥ 1-22-7(1314)
आकरं सर्वरत्नानामालयं वरुणस्य च।
नागानामालयं चापि सुरम्यं सरितां पतिम्॥ 1-22-8(1315)
पातालज्वलनावासमसुराणां तथालयम्।
भयंकराणां सत्त्वानां पयसो निधिमव्ययम्॥ 1-22-9(1316)
शुभ्रं दिव्यममर्त्यानाममृतस्याकरं परम्।
अप्रमेयमचिन्त्यं च सुपुम्यजलसंमितम्॥ 1-22-10(1317)
महानदीभिर्बह्वीभिस्तत्र तत्र सहस्रशः।
आपूर्यमाणमत्यर्थं नृत्यन्तमिव चोर्मिभिः॥ 1-22-11(1318)
इत्येवं तरलतरोर्मिसंकुलं ते
गम्भीरं विकसितमम्बरप्रकाशम्।
पातालज्वलनशिखाविदीपिताङ्गं
गर्जन्तं द्रुतमभिजग्मतुस्ततस्ते॥ ॥ 1-22-12(1319)

इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि द्वाविंशोऽध्यायः॥ 22 ॥

Mahabharata - Adi Parva - Chapter Footnotes
1-22-1 संविदं मिथ आलोचनम्॥ 1-22-3 पणिते पणं कृत वत्यौ॥ 3 ॥ द्वाविंशोऽध्यायः॥ 22 ॥


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